Thursday, April 19, 2018

अवैध कोचिंग सेंटर चलाने वालों पर हो कड़ी से कड़ी कार्यवाही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने बीएसए को सौंपा ज्ञापन


ललितपुर ब्यूरो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक राहुल राजपूत के नेतृत्व में आज सरकारी सेवारत शिक्षकों द्वारा अवैध कोचिंग सेंटर चलाने के संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि जनपद में पिछले कुछ वर्षो से सरकारी शिक्षकों द्वारा व लेखपालों द्वारा अवैध कोचिंग सेंटरों को चलाया जा रहा है। जोकि सरकारी अध्यापकों के निर्देशन में चल रही है एवं उनका रजिस्ट्रेशन अपने रिश्तेदारों के नाम से संचालित है। जो कि हम सबको ज्ञात है कि सरकारी सेवा कर्मचारी कोचिंग सेंटर नहीं चला सकते। किंतु सरकारी शिक्षक योगेंद्र यादव लगातार कोचिंग पढ़ा रहे है। जो कि ग्राम छर्र ब्लॉक बिरधा में प्राइमरी विद्यालय में कार्यरत है। जो कि जिले में दिल्ली विजन कोचिंग एन.एम.वी. कालेज के सामने कोचिंग पढ़ा रहे है। शिक्षक योगेंद्र यादव की वजह से नौनिहाल बच्चों का भविष्य खतरें में है। क्योंकि उक्त शिक्षक पूरा ध्यान कोचिंग पढ़ाने में लगाते है और विद्यालय में फर्जीवाड़ा करते है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने जिला विद्यालय निरीक्षक से कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग की। ज्ञापन में छोटू बुन्देला, आनंद पटैरिया, शिवकेश नायक, शिवम लिटौरिया, अमित कुमार साहू, महेश साहू, अंकित जैन, आशीष निरंजन, अभिषेक तिवारी, अमर सिंह बुन्देला, सुदामा पाठक, रोहित मिश्रा, कौशल प्रताप सिंह, हेमंत जैन, शिवाली राजा आदि के हस्ताक्षर मौजूद है।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल

Monday, April 16, 2018

कुठूआ व उन्नाव में घटित जघन्य अपराधों से क्षुब्ध होकर छात्रों ने निकाला पैदल मार्च छात्रों ने निकाला पैदल मार्च मोमबत्ती जलाकर दी प्राण गवाने वाले पीड़ितों को श्रद्धांजलि


कुठूआ व  उन्नाव में घटित जघन्य अपराधों से क्षुब्ध होकर छात्रों ने निकाला पैदल मार्च
छात्रों ने निकाला पैदल मार्च मोमबत्ती जलाकर दी प्राण गवाने वाले पीड़ितों को श्रद्धांजलि
ललितपुर ब्यूरो कुठूआ उन्नाव की घटना सहित महिलाओं, युवतियों व छोटी बच्चियों के साथ लगातार घटित हो रही छेड़खानी, बलात्कार, हत्या जैसे जघन्य अपराधों से उद्वेलित होकर छात्र छात्राओं ने किया प्रदर्शन निकाला कैंडल मार्च
आज दिन सोमवार को सैकड़ो युवक युवतियों ने मिलकर तुवन मन्दिर से घंटाघर के प्रांगण तक पैदल मार्च निकाला सभी युवक युवतियां विभिन्न स्कूलों के छात्र थे प्राप्त जानकारी के अनुसार कुठूआ व उन्नाव में घटित घटना सहित घटित हो रहे जघन्य अपराधों से क्षुब्ध होकर सभी छात्र छात्राएं इस तरह की घटनाओं से पीड़ित लोगों को संवेदनाएं व्यक्त करने के साथ ही पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग करने के अलावा इस तरह के अपराधों को घटित करने वाले अपराधियों को कठोर दंड दिए जाने की मांग कर रहे थे।
पैदल मार्च करते समय समस्त छात्र अपने हाथों में काली पट्टी बांधकर चल रहे थे वही छात्राएं अपने मुँह पर काली पट्टी बांधकर चल रही थी, सभी लोग अपने अपने हाथों में मोमबत्ती लेकर नारे लगाते हुए चल रहे थे घंटाघर प्रांगण में पहुंचकर सभी लोगों ने मोमबत्ती घंटाघर के चबूतरे पर लगाकर इस तरह के जघन्य अपराधों के चलते प्राण गवाने वालो को श्रद्धांजलि दी।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल

यदि नई दुनिया पुरानी दुनिया से भिन्न है तो नई दुनिया को पुरानी दुनिया से अधिक धर्म की जरूरत है :- डा.आंबेडकर



ललितपुर ब्यूरो कस्बा मड़ावरा के एक विद्यालय में भारत के संविधान निर्माता, चिंतक, समाज सुधारक भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर का जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। बाबा साहब के जन्मदिन के अवसर पर प्रधानाचार्य रामसजीवन प्रजापति की अध्यक्षता में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने कहा था मैं पहले भरतीय हूँ और बाद में भी भारतीय हूँ। उन्होंने बाबा साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनका जन्म मध्य प्रदेश के मऊ में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था। वे अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान थे। बाबा साहेब डा.अम्बेडकर का परिवार महार जाति से संबंध रखता था। जिसे अछूत माना जाता था। बचपन से ही आर्थिक और सामाजिक भेदभाव देखने वाले डा.अम्बेडकर ने विषम परिस्थितियों में पढ़ाई शुरू की। बाल विवाह प्रचलित होने के कारण 1906 में उनकी शादी नौ साल की लड़की रमाबाई से हुई। 1908 में उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज में प्रवेश लिया। इस कॉलेज में प्रवेश लेने वाले वे पहले दलित जाति के बच्चे थे। 1913 में एमए करने के लिए वे अमेरिका चले गए। अमेरिका में पढ़ाई करना बड़ौदा के गायकवाड़ शासक सहयाजी राव तृतीय से मासिक वजीफा मिलने के कारण संभव हो सका था। 1921 में लंदन स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स से उन्हें एमए की डिग्री मिली। 1925 में बाबा साहेब को बॉम्बे प्रेसिडेंसी समिति ने साइमन आयोग में काम करने के लिए नियुक्त किया। इस आयोग का विरोध पूरे भारत में किया गया था। अंबेडकर दलितों पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए बहिष्कृत भारत, मूक नायक, जनता नाम के पाक्षिक और साप्ताहिक पत्र निकालने शुरू किये। भारत की आजादी के बाद उन्हें कानून मंत्री बनाया गया। 29 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र भारत के संविधान रचना के लिए संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। 1951 में संसद में अपने हिन्दू कोड बिल मसौदे को रोके जाने के बाद अंबेडकर ने मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया. इस मसौदे में उत्तराधिकार, विवाह और अर्थव्यवस्था के कानूनों में लैंगिक समानता की बात कही गई थी।  14 अक्टूबर 1956 को अंबेडकर और उनके समर्थकों ने पंचशील को अपनाते हुए बौद्ध धर्म ग्रहण किया. अंबेडकर का मानना था कि हिंदू धर्म के अंदर दलितों को कभी भी उनका अधिकार नहीं मिल सकता है. 6 दिसंबर, 1956 को अंबेडकर की मृत्यु हो गई। गोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए वक्ता मानसिंह ने कहा कि 14 अक्टूबर 1956 को आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था. वे देवताओं के संजाल को तोड़कर एक ऐसे मुक्त मनुष्य की कल्पना कर रहे थे जो धार्मिक तो हो लेकिन गैर-बराबरी को जीवन मूल्य न माने। यदि नई दुनिया पुरानी दुनिया से भिन्न है तो नई दुनिया को पुरानी दुनिया से अधिक धर्म की जरूरत है। डा.आंबेडकर ने यह बात 1950 में 'बुद्ध और उनके धर्म का भविष्यÓ नामक एक लेख में कही थी। वे कई बरस पहले से ही मन बना चुके थे कि वे उस धर्म में अपना प्राण नहीं त्यागेंगे जिस धर्म में उन्होंने अपनी पहली सांस ली है। 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया। आज उनके इस निर्णय को याद करने का दिन है. यह उनका कोई आवेगपूर्ण निर्णय नहीं था। बल्कि इसके लिए उन्होंने पर्याप्त तैयारी की थी। उन्होंने भारत की सभ्यतागत समीक्षा की. उसके सामाजिक-आर्थिक ढांचे की बनावट को विश्लेषित किया था और सबसे बढ़कर हिंदू धर्म को देखने का विवेक विकसित किया। जब अंग्रेजों से भारत की आजादी की लड़ाई लड़ी जा रही थी तो यह बात महसूस की गई थी कि भारत को अपनी अंदरूनी दुनिया में समतापूर्ण और न्यायपूर्ण होना है। अगर भारत एक आजाद मुल्क बनेगा तो उसे सबको समान रूप से समानता देनी होगी। केवल सामाजिक समानता और सदिच्छा से काम नहीं चलने वाला है। सबको इस देश के शासन में भागीदार बनाना होगा. डाक्टर आंबेडकर इस विचार के अगुवा थे। 1930 का दशक आते-आते भारत की आजादी की लड़ाई का सामाजिक आधार पर्याप्त विकसित हो चुका था। इसमें विभिन्न समूहों की आवाजें शामिल हो रही थीं। अब आजादी की लड़ाई केवल औपनिवेशिक सत्ता से लड़ाई मात्र तक सीमित न रहकर इतिहास में छूट गए लोगों के जीवन को इसमें समाहित करने की लड़ाई के रूप में तब्दील हो रही थी। जिनके हाथ में पुस्तकें और उन्हें सृजित करने की क्षमता थी। उन्होंने बहुत से समुदायों के जीवन को मुख्यधारा से स्थगित सा कर दिया था। शोषण के सांस्कृतिक, आर्थिक एवं राजनीतिक दासत्व के प्रकट-अप्रकट तन्तुओं को रेशा-रेशा अलग करके और इनसे मुक्ति पाने की कोशिशें शुरू हुईं। आंबेडकर आजादी की लड़ाई के राजनीतिक और ज्ञानमीमांसीय स्पेस में दलितों को ले आने में सफल हुए. उन्होंने कहा कि दलितों के साथ न्याय होना चाहिए। 1932 में पूना समझौते से पहले किए गए उनके प्रयासों को हम इस दिशा में देख-समझ सकते हैं। यद्यपि इस समय दलितों को पृथक निर्वाचक-मंडल नहीं मिल सका लेकिन अब उन्हें उपेक्षित नही किया जा सकता था. जब भारत आजाद हुआ तो देश का संविधान बना. सबको चुनाव लडऩे और अपने मनपसंद व्यक्ति को अपना नेता चुनने की आजादी मिली। आज दलित अपना नेता चुन रहे हैं, वे नेता के रूप में चुने जा रहे हैं. भारत के संविधान में आंबेडकर की इन अनवरत लड़ाइयों की खुशबू फैली है। उनके जीवन और आत्मा में प्रकाश शिक्षा ही ला सकती है. यही उन्हें उस दासता से मुक्त करेगी जिसे समाज, धर्म और दर्शन ने उनके नस-नस में आरोपित कर दिया है। इस दासता को दलितों को अपनी नियति मान लेने को कहा गया था। आंबेडकर इसे तोड़ देना चाहते थे। संजाल को तोड़कर एक ऐसे मुक्त मनुष्य की कल्पना कर रहे थे जो धार्मिक तो हो लेकिन गैर-बराबरी को जीवन मूल्य न माने. इसलिए जब अक्टूबर 1956 में उन्होंने हिंदू धर्म से अपना विलगाव किया तो उन्होंने स्वयं और अपने अनुयायियों को बाइस प्रतिज्ञाएं करवाईं।
               वक्ता रामकिशोर शुक्ला ने कहा कि आंबेडकर आधुनिकता, लोकतंत्र और न्याय की संतान थे. वे पेशे से वकील भी थे. मनुष्य की गरिमा को बराबरी दिए बिना वे आधुनिकता, लोकतंत्र और न्याय की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। उन्होंने भारतीय समाज में घर और बाहर-दोनों जगह स्त्रियों की बराबरी के लिए संघर्ष किए. जब वे जवाहरलाल नेहरू की सरकार में विधिमंत्री बने तो उन्होंने स्त्रियों को न केवल घरेलू दुनिया में बल्कि उन्हें आर्थिक और लैंगिक रूप से मजबूत बनाने के लिए हिंदू कोड बिल प्रस्तुत किया। यह बिल पास नहीं होने दिया गया. आंबेडकर ने इस्तीफा दे दिया। हमें इसे जानना चाहिए कि यह बिल क्यों पास नही होने दिया गया? यदि हम यह जान सकें तो अपने आपको न्याय की उस भावना के प्रति समर्पित कर पाएंगे जिसका सपना डाक्टर भीमराव आंबेडकर ने देखा था। गोष्ठी में सरस्वती मंदिर इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य रामसजीवन प्रजापति, प्रवक्ता भवनीशंकर, रामकिशोर शुक्ला, मानसिंह, हरिशरण चौरसिया, संतोष त्रिपाठी, प्रताप सिंह, राहुल झा, पवन सिंह, खिलावन सिंह, घूमन सिंह, पंचमलाल, अनिल कुमार, दीपिका तिवारी, हफीजन बानों, वैशाली, मानबेन्द्र, दिलीप दुवे, मनहोर आदि उपस्थित रहे तथा विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन संतोष त्रिपाठी ने किया।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल

केंद्रीय मंत्री क्षेत्रीय सांसद सुश्री उमा भारती ने किया कल्यानपुरा गौवंश आश्रय स्थल का निरीक्षण तथा ग्राम मैलवारा में लगाई चौपाल


ललितपुर ब्यूरो भारत सरकार द्वारा दिये गये निर्देशों के क्रम में ग्राम स्वराज अभियान 15 अप्रैल से 05 मई के बीच में चलाया जाना है। इस अभियान की शुरूआत ललितपुर में आज रविवार को झॉसी—ललितपुर सांसद सुश्री उमा भारती मंत्री—पेयजल एवं स्वच्छता, भारत सरकार द्वारा ग्राम मैलवाराखुर्द, तहसील ललितपुर में चौपाल लगाकर की गयी। चौपाल से पूर्व सुश्री उमा भारती ने कल्यानपुरा स्थित गोवंश आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। अपने निरीक्षण के दौरान उन्होंने वहां पर उपस्थित जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि ललितपुर जनपद में स्थित कल्यानपुरा गोवंश आश्रय स्थल एक माडल है, जिस पर आगे चलकर पूरे बुन्देलखण्ड और पूरे प्रदेश में अन्ना गोवंश के लिए आश्रय स्थलों का निर्माण किया जायेगा। इस अवसर पर उन्होंने यह घोषणा की कि वह अपनी सांसद निधि से 9 लाख रूपये की धनराशि कल्यानपुरा गोवंश आश्रय स्थल के लिए प्रदान करेंगी। इस अवसर पर श्रम एवं सेवायोजन राज्य मंत्री मनोहरलाल पंथ (मन्नू कोरी) ने भी अपनी विधायक निधि से 1 लाख रूपये देने की घोषणा की। जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने इस अवसर पर सांसद को गोवंश आश्रय स्थल के निर्माण की प्रेरणा, उसकी योजना एवं सम्भावना के बारे में विस्तार से बताया। गोवंश आश्रय के निरीक्षण के उपरान्त सुश्री उमा भारती का काफिला ग्राम मैलवाराखुर्द पहुॅचा, जहां पर उन्होंने चौपाल लगायी। चौपाल के दौरान अधिशासी अभियन्ता विद्युत वितरण ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि ग्राम मैलवाराखुर्द ऊर्जीकृत है और यहां पर 12 से 14 घंटे विद्युत आपूर्ति होती है। केंद्रीय मंत्री ने ग्रामवासियों को प्रेरित किया कि वह साधारण वल्व के स्थान पर एल.ई.डी. वल्व का उपयोग करें। यह वल्व थोडा सा मंहगा जरूर है, इसका जीवनकाल अधिक होने से लम्बे समय में यह सस्ता पडता है। साथ ही इससे विद्युत की खपत भी अत्यन्त कम होती है। जिला अग्रणी बैंक प्रबन्धक एस के. श्रीवास्तव ने सुश्री उमा भारती जी, केंद्रीय मंत्री—पेयजल एवं स्वच्छता, भारत सरकार को बताया कि ग्राम मैलवाराखुर्द में प्रधानमंत्री जन धन बीमा योजना के 71 लाभार्थी, राष्ट्रीय सुरक्षा बीमा के 71 लाभार्थी, जीवन ज्योति बीमा योजना के 71 लाभार्थी तथा अटल पेंशन योजना के 1 लाभार्थियों को लाभ दिया जा रहा है। चौपाल के दौरान केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया गया कि ग्राम में 38 हैण्डपम्प है, जिनमें से एक को छोड$कर सभी क्रियाशील है। ग्राम मैलवाराखुर्द में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 142 शौचालय स्वीकृत हैं, जिसमें से 25 का निर्माण कार्य चल रहा है। ग्राम पंचायत मैलवाराखुर्द में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 19 आवास स्वीकृत हैं, जिनमें से 18 आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा 01 आवास निर्माणाधीन है। ग्राम पंचायत मैलवाराखुर्द में कुल—255 जाबकार्डधारक हैं, जिन पर वित्तीय वर्ष 2017—18 में 13750 मानव दिवस सृजित किये गये हैं। विभागों की समीक्षा के उपरान्त सुश्री उमा भारती, केंद्रीय मंत्री—पेयजल एवं स्वच्छता, भारत सरकार ने उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह सम्पूर्ण भारत हमारा अपना परिवार है और ईश्वर ने हमें इसकी सेवा करने का अवसर दिया है, उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों से चले आ रहे ढर्रे के कारण अधिकारी कार्य संस्कृति भूल गये थे, परन्तु अधिकारी वही हैं, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के निर्देशन में लगातार अच्छा कार्य करते जा रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने जिलाधिकारी  की कल्यानपुरा गोवंश आश्रय स्थल के निर्माण के लिए भूरि भूरि प्रशंसा की। उन्होने कहा कि जनपद ललितपुर के 05 गांव पिपरिया वंशा, सिमरिया, बरौदिया, खाकरौन तथा मैलवाराखुर्द भारत सरकार द्वारा स्थापित मानकों के अनुसार पिछडे ग्रामों में शामिल है और हमारा यह लक्ष्य है कि 05 मई, 2018 तक हमें इन पांचों गांवों को पिछडे ग्रामों की सूची से बाहर निकाल कर विकसित ग्रामों की सूची में शामिल करना है। हमें यह उम्मीद है कि यह कार्य आप सभी ग्रामवासियों और जनपद के अधिकारियों के मिले जुले प्रयास से हम लक्षित तिथि से पहले ही पूर्ण कर लेंगे। चौपाल में श्रम एवं सेवायोजन राज्य मंत्री मनोहरलाल पंथ (मन्नू कोरी), सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौबे, भारतीय जनता पार्टी जिलाध्यक्ष रमेश सिंह लोधी, पुलिस अधीक्षक डा. ओ.पी. सिंह, मुख्य विकास अधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार, मुख्य चिकित्साधिकारी प्रताप सिंह सहित समस्त जिला स्तरीय अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल