Tuesday, April 24, 2018

एकता के सूत्र में बांधता है संगठन - आत्महत्या नहीं आत्म साधना है संलेखना (संथारा) :- राष्ट्र संत आचार्य ज्ञानसागर


ललितपुर ब्यूरो क्षेत्रपाल जैन मंदिर प्रांगण में मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्र संत, आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि मनुष्य के जीवन में संगठन का बड़ा महत्व है। अकेला मनुष्य शक्तिहीन है, जबकि संगठित होने पर उसमें शक्ति आ जाती है। संगठन की शक्ति से मनुष्य बड़े-बड़े कार्य भी आसानी से कर सकता है। संगठन में ही मनुष्य की सभी समस्याओं का हल है। जो परिवार और समाज संगठित होता है वहां हमेशा खुशियां और शांति बनी रहती है और ऐसा देश तरक्की के नित नए सोपान तय करता है। इसके विपरीत जो परिवार और समाज असंगठित होता है वहां आए दिन किसी न किसी बात पर कलह होती रहती है जिससे वहां हमेशा अशांति का माहौल बना रखता है, उन्होंने कहा कि संगठित परिवार, समाज और देश का कोई भी दुश्मन कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जबकि असंगठित होने पर दुश्मन जब चाहे आप पर हावी हो सकता है। संगठन का प्रत्येक क्षेत्र में विशेष महत्व होता है, जबकि बिखराव किसी भी क्षेत्र में अच्छा नहीं होता है संगठन का मार्ग ही मनुष्य की विजय का मार्ग है आचार्यश्री ने कहा कि कोई भी धर्म आपस में बैर करना नहीं सिखाता। सभी धर्मों में कहा गया है कि मनुष्य को परस्पर प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना चाहिए। मनुष्य जब एकमत होकर कार्य करता है तो संपन्नता और प्रगति को प्राप्त करता है। संगठन में प्रत्येक व्यक्ति का विशेष महत्व होता है इसलिए जब मनुष्य संगठित होकर कोई कार्य करता है तो उसके परिणाम में विविधता देखने को मिलती है, एकता ही समाज का दीपक है- एकता ही शांति का खजाना है। संगठन ही सर्वोत्कृष्ट शक्ति है। संगठन ही समाजोत्थान का आधार है। संगठन बिन समाज का उत्थान संभव नहीं। एकता के बिना समाज आदर्श स्थापित नहीं कर सकता क्योंकि एकता ही समाज एवं देश के लिए अमोघ शक्ति है, किन्तु विघटन समाज के लिए विनाशक शक्ति है, आचार्यश्री ने हाल ही में आये सुप्रीमकोर्ट के इच्छा मृत्यु के निर्णय का उल्लेख किया और जैन धर्म में सल्लेखना के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जैन आचार शास्त्र में सल्लेखनापूर्वक होने वाली मृत्यु को समाधिमरण, पंडितमरण अथवा संधारा भी कहा जाता है। इसका अर्थ है- जीवन के अंतिम समय में तप-विशेष की आराधना करना। समाधिपूर्वक मृत्यु का वरण करना ही मृत्यु महोत्सव है। मृत्यु से भयाक्रांत भोगी और अज्ञानी लोग ही सल्लेखना समाधिमरण को अपघात कहते हैं ,जबकि समाधिपूर्वक मरण अपघात नहीं है। विचारों की दृढ़ता और प्रसन्न चित्त वाला व्यक्ति ही सल्लेखना को धारण कर सकता है, सल्लेखना, संथारा एक धार्मिक प्रक्रिया है, न कि आत्महत्या, उन्होंने कहा कि जैन धर्म एक प्राचीन धर्म है इस धर्म मैं भगवान महावीर ने जियो और जीने दो का सन्देश दिया हैं ।जैन धर्म मैं एक छोटे से जीव की हत्या भी पाप मानी गयी है, तो आत्महत्या जैसा कृत्य तो महा पाप कहलाता हैं। सभी धर्मों में आत्महत्या करना पाप मान गया हैं। आम जैन श्रावक सल्लेखना या  संथारा तभी लेता है जब डॉक्टर, परिजनों को बोल देता है कि अब सब उपरवाले के हाथ मैं है तभी यह धार्मिक प्रक्रिया अपनाई जाती हैं , इससे पूर्व धर्मसभा का शुभारंभ डॉ. सुनील संचय के द्वारा संस्कृत और प्राकृत भाषा में प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। इस अवसर पर बाहर से आये अतिथियों, श्रेष्ठि और विद्वत्जनों द्वारा आचार्य श्री विद्यासागर जी और आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्ज्वलन किया गया इस अवसर पर जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डा. अक्षय टडैया, संयोजक प्रदीप सतरवांस, प्रबन्धकद्वय मोदी पंकज पार्षद, राजेन्द्र लल्लू थनवारा, उपाध्यक्ष मीना इमलिया, डा. सुनील संचय, डॉ. संजीव कडंकी, अक्षय अलया, संजीव जैन ममता स्पोटर्स, जिनेंद्र जैन डिस्को, गेंदालाल सतभैया, अखिलेश गदयाना, पंडित ज्ञानचंद्र जैन सागर,  पंडित शीतल चंद्र जैन, जिनेंद्र थनवारा, महेन्द जैन,महेंद्र सिंघई, सोमचंद्र जैन, निहालचंद्र चंद्रेश, पंडित मुकेश गुड़गांव, पंडित वीरेंद्र जैन, अजित जैन एडवोकेट, सुरेश इमलिया, सनत खजुरिया, शिखरचंद्र बंट , सतीश जैन आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण, श्रेष्ठि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे
 मुज्जफरनगर, सागर, गुड़गांव से पधारे श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद
इस अवसर पर मुज्जफरनगर से आये प्राच्य श्रमण भारती के मनीष जैन, रविन्द्र जैन आदि तथा गुड़गांव, सागर से आये आचार्यश्री के भक्तों ने श्रीफ़ल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया कार्यक्रम का संचालन जैन पंचायत के महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया ने किया।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल

शिकायतें आने पर जिलाधिकारी ने गेंहू क्रय केन्द्रों का किया औचक निरीक्षण


ललितपुर ब्यूरो जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह द्वारा आज दिन सोमवार को जनपद के 04 गेंहू क्रय केन्द्रों में जाखलौन एफएसएस—1 केन्द्र कृषि मण्डी, जाखलौन एफएसएस—2 बरौदा बिजलौन, जाखलौन रोड महेशपुरा, ललितपुर एफएसएस केन्द्र खिरियामिश्र  का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गेंहू क्रय केन्द्रों पर अनेक अनियमिततायें पायीं। किसी भी केन्द्र पर व्यवस्थित रूप में कूपन रजिस्टर  नहीं बनाया गया,  जिस क्रय केन्द्र पर कूपन रजिस्टर बना भी है, वहां पर मनमाने ढंग से गेंहू खरीदा जा रहा है, तथा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। जाखलौन स्थित दो गेंहू क्रय केन्द्रों (जाखलौन एफएसएस—1 केन्द्र कृषि मण्डी, जाखलौन एफएसएस—2 बरौदा बिजलौन) में 04 अप्रैल से गेंहू खरीदा गया है, किन्तु दोनो केन्द्रों के केन्द्र प्रभारियों द्वारा कूपनों का दुरूपयोग किया जा रहा है, जिस पर जिलाधिकारी द्वारा शिकायतों के परिपेक्ष्य में दोनों केन्द्र प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया। जाखलौन स्थित उपरोक्त दोनों केन्द्रों की बोरियों की तौल कराने पर ज्ञात हुआ कि प्रत्येक बोरी में एक से डेढ  कि.ग्रा. गेंहू कम पाया गया। इससे स्पष्ट हुआ कि बोरियों से गेंहू निकाला जा रहा है तथा कम गेंहू के साथ बोरियों में सिलाई की जा रही हैं। अत: सुनिश्चित किया जाये कि जो भी मात्रा अनुमन्य हो, उससे कम या अधिक गेंहू बोरियों में नहीं होना चाहिए। जाखलौन रोड महेशपुरा स्थित राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के गेंहू क्रय केन्द्र पर भी कोई कूपन रजिस्टर नहीं बनाया गया। केन्द्र प्रभारी ने अपने बयान भी दर्ज कराये। राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के केन्द्रों के सम्बंध में बहुतायत में शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। केन्द्र पर जिस कर्मचारी को तैनात किया गया है, उसे कोई भी जानकारी प्राप्त नहीं है। वह कृषकों को भुगतान किये जाने के सम्बंध में भी कोई जानकारी नहीं दे सके। एक कृषक चतुर्भुज से मोबाइल पर बात की गयी, उसने बताया कि उससे बीस रूपये प्रति कुन्तल की दर से पैसा लिया गया है, अत: प्राप्त शिकायतों के आधार पर तथा इस केन्द्र के समीप दो केन्द्र जाखलौन में व एक केन्द्र खिरियामिश्र में स्थापित होने के कारण जाखलौन रोड महेशपुरा स्थित राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के गेंहू क्रय केन्द्र को बने रहने का औचित्य उपयुक्त ना समझते हुए जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने  केन्द्र को बंद किए जाने की अनुशंसा की। गेहूँ के क्रय केन्द्रों से गेहूँ के  उठान की स्थिती खराब देखकर जाखलौन स्थित उपर्युक्त दोनों गेंहू क्रय केन्द्रो से गेहूँ के बोरों का  उठान नहीं होने पर तथा  खिरियामिश्र में भी गेहूँ के बोरों का उठान नहीं हो पाने के कारण वहां की गेहूँ तौल नहीं हो पाने के चलते गेहूँ क्रय केन्द्रों से गेंहू की उठान के सम्बंध में तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया। भुगतान के सम्बंध में केन्द्र प्रभारी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाये। किसी अवकाश के दिन सभी केन्द्र प्रभारियों को बुलाकर नियमों व निर्देशों के सम्बंध में अवगत कराते हुए प्रभावी रूप से अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश भी जिलाधिकारी ने दिया भुगतान के सम्बंध में प्रत्येक गेंहू क्रय केन्द्र पर कडी नजर रखी जाये। निरीक्षण के दौरान अनेक कृषकों से प्रत्यक्ष एवं मोबाइल पर बात की गयी तो पाया गया कि कूपन रजिस्टर में अंकित क्रमांक से गेंहू की तौल नहीं की जा रही है। अर्थात ‘‘प्रथम आवत प्रथम पावत’’ के सिद्धान्त का पालन नहीं किया जा रहा है। अपितु केन्द्र प्रभारियों द्वारा मनमाने ढंग से तौल की जा रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि उप जिलाधिकारियों व अन्य निरीक्षण अधिकारियों द्वारा निरीक्षण सरसरी तौर पर किया जा रहा है। जिलाधिकारी द्वारा जिन भी गेंहू क्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया गया है, उनमें कमियां पायी गयी हैं। तदनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की गयी है। अत: जांच गहनता से की जाये ताकि कृषकों का उत्पीडन न हो सके।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल

Sunday, April 22, 2018

एक मई तक जमा करे औद्योगिक/सेवा क्षेत्र की इकाई स्थापित करने हेतु आवेदन पत्र


ललितपुर ब्यूरो जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र के उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुये बताया कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत अपनी औद्योगिक/सेवा क्षेत्र की इकाई स्थापित करने हेतु इच्छुक व्यक्तियों से आवेदन पत्र 01 मई तक आमंत्रित किये जा रहे हैं। योजनान्तर्गत उद्योग क्षेत्र की 25 लाख रूपये तक की कुल परियोजना लागत की सूक्ष्म इकाइयों तथा सेवा क्षेत्र की दस लाख रूपये तक की कुल परियोजना लागत की सूक्ष्म इकाईयों को कुल परियोजना लागत का 25 प्रतिशत उद्योग क्षेत्र हेतु अधिकतम 6.25 लाख रूपये तथा सेवा क्षेत्र हेतु अधिकतम 2.5 लाख रूपये की सीमा तक मार्जिनमनी उपलब्ध कराया जायेगा, जो उद्यम के 02 वर्ष तक सफल संचालन के उपरान्त अनुदान में परिवर्तित हो जायेगा।
योजनान्तर्गत सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों द्वारा परियोजना लागत का 1 प्रतिशत अपने अंशदान के रूप में जमा करना होगा। विशेष श्रेणी के लाभार्थियों यथा— अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड$ा वर्ग, अल्पसंख्यक, महिला एवं दिव्यांगजन हेतु अंशदान की सीमा कुल परियोजना लागत की 5 प्रतिशत होगी। कुल परियोजना लागत में पूॅजी व्यय (भूमि क्रय की लागत को छोड$कर) और कार्यशील पूॅजी का एक चक्र शामिल होंगे। परियोजना लागत में किराये पर वर्कशॉप/वर्कशेड लिए जाने को शामिल किया जा सकता है परन्तु भूमि क्रय की लागत को परियोजना लागत में सम्मिलित नहीं किया जायेगा।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल