Sunday, April 29, 2018

यातायात नियमों का सभी विद्यार्थी प्राथमिकता से करें पालन: एआरटीओ


सुरक्षित यात्रा के लिए जीवन में नियमों का पालन आवश्यक: पुलिस उपाधीक्षक 
ललितपुर। 29वॉ राष्ट्रीय सडक सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत आज शनिवार को प्रात: यातायात पुलिस व सम्भागीय परिवहन अधिकारी सत्येन्द्र सिंह द्वारा तुवन चौराहा एवं सदनशाह चौराहा पर संयुक्त रूप से स्कूल में संचालित होने वाले निजी वाहनों व स्कूल में लगे प्राइवेट वाहनों की सघन चेकिंग की गयी, जिन वाहनों में मानक से अधिक स्कूली बच्चे बैठाये हुए पाये गये उनके विरूद्व वैद्यानिक कार्यवाही की गयी। इसी क्रम में संस्कार वैली एकेडमी स्कूल मसौरा कलॉ में स्कूली बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारम्भ सहायक परिवहन अधिकारी सत्येन्द्र सिंह द्वारा दीप प्रजवल्लित करके किया गया। क्षेत्राधिकारी यातायात हिमांशु गौरव व सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी एवं सहायक यातायात प्रभारी नरेन्द्र सिंह द्वारा स्कूल के छात्र/छात्राओं को यातायात नियमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी व दो पहिया वाहन चलाते समय सदैव हेलमेट का उपयोग करने व तीन सवारी बैठाकर न चलने के लिए प्रेरित किया तथा चार पहिया वाहन चलाते समय हमेशा सीट बेल्ट का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। स्कूली छात्र/छात्राओं के माध्यम से अपने अभिभावकों को यातायात नियमों का उपयोग करने के लिए सन्देश दिया गया, साथ ही सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी द्वारा समस्त छात्र/छात्राओं व स्कूल के समस्त स्टाफ को यातायात नियमों का सदैव अमल में लाने के लिए शपथ दिलायी गयी व स्कूली बच्चों द्वारा सडक सुरक्षा जीवन रक्षा पर लघुनाटिका प्रस्तुत की गयी। कार्यशाला की अध्यक्षता स्कूल के संस्थापक अजय जैन द्वारा की गयी व कार्यक्रम के दौरान यातायात पुलिस का समस्त स्टाप का. दीपक कुमार दुबे, का. इसरार खॉ, का. दुर्गेश कुमार, का. छोटे खॉ, का. अनूप सिंह एवं स्कूल स्टाफ प्रधानाचार्य अभय जैन, अमित कुमार, नवनीत पटेल, कृष्ष मुरारी, पंकज दुबे, हेमन्त पाण्डे, निखिल द्विवेदी, प्रशान्त जैन, श्रेया निगम, अकांक्षा जैन, अनिल जोशी व समस्त टीचर स्टाफ मौजूद रहा।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल

Tuesday, April 24, 2018

एकता के सूत्र में बांधता है संगठन - आत्महत्या नहीं आत्म साधना है संलेखना (संथारा) :- राष्ट्र संत आचार्य ज्ञानसागर


ललितपुर ब्यूरो क्षेत्रपाल जैन मंदिर प्रांगण में मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्र संत, आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि मनुष्य के जीवन में संगठन का बड़ा महत्व है। अकेला मनुष्य शक्तिहीन है, जबकि संगठित होने पर उसमें शक्ति आ जाती है। संगठन की शक्ति से मनुष्य बड़े-बड़े कार्य भी आसानी से कर सकता है। संगठन में ही मनुष्य की सभी समस्याओं का हल है। जो परिवार और समाज संगठित होता है वहां हमेशा खुशियां और शांति बनी रहती है और ऐसा देश तरक्की के नित नए सोपान तय करता है। इसके विपरीत जो परिवार और समाज असंगठित होता है वहां आए दिन किसी न किसी बात पर कलह होती रहती है जिससे वहां हमेशा अशांति का माहौल बना रखता है, उन्होंने कहा कि संगठित परिवार, समाज और देश का कोई भी दुश्मन कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जबकि असंगठित होने पर दुश्मन जब चाहे आप पर हावी हो सकता है। संगठन का प्रत्येक क्षेत्र में विशेष महत्व होता है, जबकि बिखराव किसी भी क्षेत्र में अच्छा नहीं होता है संगठन का मार्ग ही मनुष्य की विजय का मार्ग है आचार्यश्री ने कहा कि कोई भी धर्म आपस में बैर करना नहीं सिखाता। सभी धर्मों में कहा गया है कि मनुष्य को परस्पर प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना चाहिए। मनुष्य जब एकमत होकर कार्य करता है तो संपन्नता और प्रगति को प्राप्त करता है। संगठन में प्रत्येक व्यक्ति का विशेष महत्व होता है इसलिए जब मनुष्य संगठित होकर कोई कार्य करता है तो उसके परिणाम में विविधता देखने को मिलती है, एकता ही समाज का दीपक है- एकता ही शांति का खजाना है। संगठन ही सर्वोत्कृष्ट शक्ति है। संगठन ही समाजोत्थान का आधार है। संगठन बिन समाज का उत्थान संभव नहीं। एकता के बिना समाज आदर्श स्थापित नहीं कर सकता क्योंकि एकता ही समाज एवं देश के लिए अमोघ शक्ति है, किन्तु विघटन समाज के लिए विनाशक शक्ति है, आचार्यश्री ने हाल ही में आये सुप्रीमकोर्ट के इच्छा मृत्यु के निर्णय का उल्लेख किया और जैन धर्म में सल्लेखना के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जैन आचार शास्त्र में सल्लेखनापूर्वक होने वाली मृत्यु को समाधिमरण, पंडितमरण अथवा संधारा भी कहा जाता है। इसका अर्थ है- जीवन के अंतिम समय में तप-विशेष की आराधना करना। समाधिपूर्वक मृत्यु का वरण करना ही मृत्यु महोत्सव है। मृत्यु से भयाक्रांत भोगी और अज्ञानी लोग ही सल्लेखना समाधिमरण को अपघात कहते हैं ,जबकि समाधिपूर्वक मरण अपघात नहीं है। विचारों की दृढ़ता और प्रसन्न चित्त वाला व्यक्ति ही सल्लेखना को धारण कर सकता है, सल्लेखना, संथारा एक धार्मिक प्रक्रिया है, न कि आत्महत्या, उन्होंने कहा कि जैन धर्म एक प्राचीन धर्म है इस धर्म मैं भगवान महावीर ने जियो और जीने दो का सन्देश दिया हैं ।जैन धर्म मैं एक छोटे से जीव की हत्या भी पाप मानी गयी है, तो आत्महत्या जैसा कृत्य तो महा पाप कहलाता हैं। सभी धर्मों में आत्महत्या करना पाप मान गया हैं। आम जैन श्रावक सल्लेखना या  संथारा तभी लेता है जब डॉक्टर, परिजनों को बोल देता है कि अब सब उपरवाले के हाथ मैं है तभी यह धार्मिक प्रक्रिया अपनाई जाती हैं , इससे पूर्व धर्मसभा का शुभारंभ डॉ. सुनील संचय के द्वारा संस्कृत और प्राकृत भाषा में प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। इस अवसर पर बाहर से आये अतिथियों, श्रेष्ठि और विद्वत्जनों द्वारा आचार्य श्री विद्यासागर जी और आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्ज्वलन किया गया इस अवसर पर जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डा. अक्षय टडैया, संयोजक प्रदीप सतरवांस, प्रबन्धकद्वय मोदी पंकज पार्षद, राजेन्द्र लल्लू थनवारा, उपाध्यक्ष मीना इमलिया, डा. सुनील संचय, डॉ. संजीव कडंकी, अक्षय अलया, संजीव जैन ममता स्पोटर्स, जिनेंद्र जैन डिस्को, गेंदालाल सतभैया, अखिलेश गदयाना, पंडित ज्ञानचंद्र जैन सागर,  पंडित शीतल चंद्र जैन, जिनेंद्र थनवारा, महेन्द जैन,महेंद्र सिंघई, सोमचंद्र जैन, निहालचंद्र चंद्रेश, पंडित मुकेश गुड़गांव, पंडित वीरेंद्र जैन, अजित जैन एडवोकेट, सुरेश इमलिया, सनत खजुरिया, शिखरचंद्र बंट , सतीश जैन आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण, श्रेष्ठि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे
 मुज्जफरनगर, सागर, गुड़गांव से पधारे श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद
इस अवसर पर मुज्जफरनगर से आये प्राच्य श्रमण भारती के मनीष जैन, रविन्द्र जैन आदि तथा गुड़गांव, सागर से आये आचार्यश्री के भक्तों ने श्रीफ़ल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया कार्यक्रम का संचालन जैन पंचायत के महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया ने किया।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल

शिकायतें आने पर जिलाधिकारी ने गेंहू क्रय केन्द्रों का किया औचक निरीक्षण


ललितपुर ब्यूरो जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह द्वारा आज दिन सोमवार को जनपद के 04 गेंहू क्रय केन्द्रों में जाखलौन एफएसएस—1 केन्द्र कृषि मण्डी, जाखलौन एफएसएस—2 बरौदा बिजलौन, जाखलौन रोड महेशपुरा, ललितपुर एफएसएस केन्द्र खिरियामिश्र  का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गेंहू क्रय केन्द्रों पर अनेक अनियमिततायें पायीं। किसी भी केन्द्र पर व्यवस्थित रूप में कूपन रजिस्टर  नहीं बनाया गया,  जिस क्रय केन्द्र पर कूपन रजिस्टर बना भी है, वहां पर मनमाने ढंग से गेंहू खरीदा जा रहा है, तथा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। जाखलौन स्थित दो गेंहू क्रय केन्द्रों (जाखलौन एफएसएस—1 केन्द्र कृषि मण्डी, जाखलौन एफएसएस—2 बरौदा बिजलौन) में 04 अप्रैल से गेंहू खरीदा गया है, किन्तु दोनो केन्द्रों के केन्द्र प्रभारियों द्वारा कूपनों का दुरूपयोग किया जा रहा है, जिस पर जिलाधिकारी द्वारा शिकायतों के परिपेक्ष्य में दोनों केन्द्र प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया। जाखलौन स्थित उपरोक्त दोनों केन्द्रों की बोरियों की तौल कराने पर ज्ञात हुआ कि प्रत्येक बोरी में एक से डेढ  कि.ग्रा. गेंहू कम पाया गया। इससे स्पष्ट हुआ कि बोरियों से गेंहू निकाला जा रहा है तथा कम गेंहू के साथ बोरियों में सिलाई की जा रही हैं। अत: सुनिश्चित किया जाये कि जो भी मात्रा अनुमन्य हो, उससे कम या अधिक गेंहू बोरियों में नहीं होना चाहिए। जाखलौन रोड महेशपुरा स्थित राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के गेंहू क्रय केन्द्र पर भी कोई कूपन रजिस्टर नहीं बनाया गया। केन्द्र प्रभारी ने अपने बयान भी दर्ज कराये। राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के केन्द्रों के सम्बंध में बहुतायत में शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। केन्द्र पर जिस कर्मचारी को तैनात किया गया है, उसे कोई भी जानकारी प्राप्त नहीं है। वह कृषकों को भुगतान किये जाने के सम्बंध में भी कोई जानकारी नहीं दे सके। एक कृषक चतुर्भुज से मोबाइल पर बात की गयी, उसने बताया कि उससे बीस रूपये प्रति कुन्तल की दर से पैसा लिया गया है, अत: प्राप्त शिकायतों के आधार पर तथा इस केन्द्र के समीप दो केन्द्र जाखलौन में व एक केन्द्र खिरियामिश्र में स्थापित होने के कारण जाखलौन रोड महेशपुरा स्थित राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के गेंहू क्रय केन्द्र को बने रहने का औचित्य उपयुक्त ना समझते हुए जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने  केन्द्र को बंद किए जाने की अनुशंसा की। गेहूँ के क्रय केन्द्रों से गेहूँ के  उठान की स्थिती खराब देखकर जाखलौन स्थित उपर्युक्त दोनों गेंहू क्रय केन्द्रो से गेहूँ के बोरों का  उठान नहीं होने पर तथा  खिरियामिश्र में भी गेहूँ के बोरों का उठान नहीं हो पाने के कारण वहां की गेहूँ तौल नहीं हो पाने के चलते गेहूँ क्रय केन्द्रों से गेंहू की उठान के सम्बंध में तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया। भुगतान के सम्बंध में केन्द्र प्रभारी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाये। किसी अवकाश के दिन सभी केन्द्र प्रभारियों को बुलाकर नियमों व निर्देशों के सम्बंध में अवगत कराते हुए प्रभावी रूप से अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश भी जिलाधिकारी ने दिया भुगतान के सम्बंध में प्रत्येक गेंहू क्रय केन्द्र पर कडी नजर रखी जाये। निरीक्षण के दौरान अनेक कृषकों से प्रत्यक्ष एवं मोबाइल पर बात की गयी तो पाया गया कि कूपन रजिस्टर में अंकित क्रमांक से गेंहू की तौल नहीं की जा रही है। अर्थात ‘‘प्रथम आवत प्रथम पावत’’ के सिद्धान्त का पालन नहीं किया जा रहा है। अपितु केन्द्र प्रभारियों द्वारा मनमाने ढंग से तौल की जा रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि उप जिलाधिकारियों व अन्य निरीक्षण अधिकारियों द्वारा निरीक्षण सरसरी तौर पर किया जा रहा है। जिलाधिकारी द्वारा जिन भी गेंहू क्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया गया है, उनमें कमियां पायी गयी हैं। तदनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की गयी है। अत: जांच गहनता से की जाये ताकि कृषकों का उत्पीडन न हो सके।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल

Sunday, April 22, 2018

एक मई तक जमा करे औद्योगिक/सेवा क्षेत्र की इकाई स्थापित करने हेतु आवेदन पत्र


ललितपुर ब्यूरो जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र के उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुये बताया कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत अपनी औद्योगिक/सेवा क्षेत्र की इकाई स्थापित करने हेतु इच्छुक व्यक्तियों से आवेदन पत्र 01 मई तक आमंत्रित किये जा रहे हैं। योजनान्तर्गत उद्योग क्षेत्र की 25 लाख रूपये तक की कुल परियोजना लागत की सूक्ष्म इकाइयों तथा सेवा क्षेत्र की दस लाख रूपये तक की कुल परियोजना लागत की सूक्ष्म इकाईयों को कुल परियोजना लागत का 25 प्रतिशत उद्योग क्षेत्र हेतु अधिकतम 6.25 लाख रूपये तथा सेवा क्षेत्र हेतु अधिकतम 2.5 लाख रूपये की सीमा तक मार्जिनमनी उपलब्ध कराया जायेगा, जो उद्यम के 02 वर्ष तक सफल संचालन के उपरान्त अनुदान में परिवर्तित हो जायेगा।
योजनान्तर्गत सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों द्वारा परियोजना लागत का 1 प्रतिशत अपने अंशदान के रूप में जमा करना होगा। विशेष श्रेणी के लाभार्थियों यथा— अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड$ा वर्ग, अल्पसंख्यक, महिला एवं दिव्यांगजन हेतु अंशदान की सीमा कुल परियोजना लागत की 5 प्रतिशत होगी। कुल परियोजना लागत में पूॅजी व्यय (भूमि क्रय की लागत को छोड$कर) और कार्यशील पूॅजी का एक चक्र शामिल होंगे। परियोजना लागत में किराये पर वर्कशॉप/वर्कशेड लिए जाने को शामिल किया जा सकता है परन्तु भूमि क्रय की लागत को परियोजना लागत में सम्मिलित नहीं किया जायेगा।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल

Thursday, April 19, 2018

अवैध कोचिंग सेंटर चलाने वालों पर हो कड़ी से कड़ी कार्यवाही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने बीएसए को सौंपा ज्ञापन


ललितपुर ब्यूरो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक राहुल राजपूत के नेतृत्व में आज सरकारी सेवारत शिक्षकों द्वारा अवैध कोचिंग सेंटर चलाने के संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि जनपद में पिछले कुछ वर्षो से सरकारी शिक्षकों द्वारा व लेखपालों द्वारा अवैध कोचिंग सेंटरों को चलाया जा रहा है। जोकि सरकारी अध्यापकों के निर्देशन में चल रही है एवं उनका रजिस्ट्रेशन अपने रिश्तेदारों के नाम से संचालित है। जो कि हम सबको ज्ञात है कि सरकारी सेवा कर्मचारी कोचिंग सेंटर नहीं चला सकते। किंतु सरकारी शिक्षक योगेंद्र यादव लगातार कोचिंग पढ़ा रहे है। जो कि ग्राम छर्र ब्लॉक बिरधा में प्राइमरी विद्यालय में कार्यरत है। जो कि जिले में दिल्ली विजन कोचिंग एन.एम.वी. कालेज के सामने कोचिंग पढ़ा रहे है। शिक्षक योगेंद्र यादव की वजह से नौनिहाल बच्चों का भविष्य खतरें में है। क्योंकि उक्त शिक्षक पूरा ध्यान कोचिंग पढ़ाने में लगाते है और विद्यालय में फर्जीवाड़ा करते है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने जिला विद्यालय निरीक्षक से कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग की। ज्ञापन में छोटू बुन्देला, आनंद पटैरिया, शिवकेश नायक, शिवम लिटौरिया, अमित कुमार साहू, महेश साहू, अंकित जैन, आशीष निरंजन, अभिषेक तिवारी, अमर सिंह बुन्देला, सुदामा पाठक, रोहित मिश्रा, कौशल प्रताप सिंह, हेमंत जैन, शिवाली राजा आदि के हस्ताक्षर मौजूद है।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल

Monday, April 16, 2018

कुठूआ व उन्नाव में घटित जघन्य अपराधों से क्षुब्ध होकर छात्रों ने निकाला पैदल मार्च छात्रों ने निकाला पैदल मार्च मोमबत्ती जलाकर दी प्राण गवाने वाले पीड़ितों को श्रद्धांजलि


कुठूआ व  उन्नाव में घटित जघन्य अपराधों से क्षुब्ध होकर छात्रों ने निकाला पैदल मार्च
छात्रों ने निकाला पैदल मार्च मोमबत्ती जलाकर दी प्राण गवाने वाले पीड़ितों को श्रद्धांजलि
ललितपुर ब्यूरो कुठूआ उन्नाव की घटना सहित महिलाओं, युवतियों व छोटी बच्चियों के साथ लगातार घटित हो रही छेड़खानी, बलात्कार, हत्या जैसे जघन्य अपराधों से उद्वेलित होकर छात्र छात्राओं ने किया प्रदर्शन निकाला कैंडल मार्च
आज दिन सोमवार को सैकड़ो युवक युवतियों ने मिलकर तुवन मन्दिर से घंटाघर के प्रांगण तक पैदल मार्च निकाला सभी युवक युवतियां विभिन्न स्कूलों के छात्र थे प्राप्त जानकारी के अनुसार कुठूआ व उन्नाव में घटित घटना सहित घटित हो रहे जघन्य अपराधों से क्षुब्ध होकर सभी छात्र छात्राएं इस तरह की घटनाओं से पीड़ित लोगों को संवेदनाएं व्यक्त करने के साथ ही पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग करने के अलावा इस तरह के अपराधों को घटित करने वाले अपराधियों को कठोर दंड दिए जाने की मांग कर रहे थे।
पैदल मार्च करते समय समस्त छात्र अपने हाथों में काली पट्टी बांधकर चल रहे थे वही छात्राएं अपने मुँह पर काली पट्टी बांधकर चल रही थी, सभी लोग अपने अपने हाथों में मोमबत्ती लेकर नारे लगाते हुए चल रहे थे घंटाघर प्रांगण में पहुंचकर सभी लोगों ने मोमबत्ती घंटाघर के चबूतरे पर लगाकर इस तरह के जघन्य अपराधों के चलते प्राण गवाने वालो को श्रद्धांजलि दी।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल

यदि नई दुनिया पुरानी दुनिया से भिन्न है तो नई दुनिया को पुरानी दुनिया से अधिक धर्म की जरूरत है :- डा.आंबेडकर



ललितपुर ब्यूरो कस्बा मड़ावरा के एक विद्यालय में भारत के संविधान निर्माता, चिंतक, समाज सुधारक भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर का जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। बाबा साहब के जन्मदिन के अवसर पर प्रधानाचार्य रामसजीवन प्रजापति की अध्यक्षता में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने कहा था मैं पहले भरतीय हूँ और बाद में भी भारतीय हूँ। उन्होंने बाबा साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनका जन्म मध्य प्रदेश के मऊ में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था। वे अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान थे। बाबा साहेब डा.अम्बेडकर का परिवार महार जाति से संबंध रखता था। जिसे अछूत माना जाता था। बचपन से ही आर्थिक और सामाजिक भेदभाव देखने वाले डा.अम्बेडकर ने विषम परिस्थितियों में पढ़ाई शुरू की। बाल विवाह प्रचलित होने के कारण 1906 में उनकी शादी नौ साल की लड़की रमाबाई से हुई। 1908 में उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज में प्रवेश लिया। इस कॉलेज में प्रवेश लेने वाले वे पहले दलित जाति के बच्चे थे। 1913 में एमए करने के लिए वे अमेरिका चले गए। अमेरिका में पढ़ाई करना बड़ौदा के गायकवाड़ शासक सहयाजी राव तृतीय से मासिक वजीफा मिलने के कारण संभव हो सका था। 1921 में लंदन स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स से उन्हें एमए की डिग्री मिली। 1925 में बाबा साहेब को बॉम्बे प्रेसिडेंसी समिति ने साइमन आयोग में काम करने के लिए नियुक्त किया। इस आयोग का विरोध पूरे भारत में किया गया था। अंबेडकर दलितों पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए बहिष्कृत भारत, मूक नायक, जनता नाम के पाक्षिक और साप्ताहिक पत्र निकालने शुरू किये। भारत की आजादी के बाद उन्हें कानून मंत्री बनाया गया। 29 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र भारत के संविधान रचना के लिए संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। 1951 में संसद में अपने हिन्दू कोड बिल मसौदे को रोके जाने के बाद अंबेडकर ने मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया. इस मसौदे में उत्तराधिकार, विवाह और अर्थव्यवस्था के कानूनों में लैंगिक समानता की बात कही गई थी।  14 अक्टूबर 1956 को अंबेडकर और उनके समर्थकों ने पंचशील को अपनाते हुए बौद्ध धर्म ग्रहण किया. अंबेडकर का मानना था कि हिंदू धर्म के अंदर दलितों को कभी भी उनका अधिकार नहीं मिल सकता है. 6 दिसंबर, 1956 को अंबेडकर की मृत्यु हो गई। गोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए वक्ता मानसिंह ने कहा कि 14 अक्टूबर 1956 को आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था. वे देवताओं के संजाल को तोड़कर एक ऐसे मुक्त मनुष्य की कल्पना कर रहे थे जो धार्मिक तो हो लेकिन गैर-बराबरी को जीवन मूल्य न माने। यदि नई दुनिया पुरानी दुनिया से भिन्न है तो नई दुनिया को पुरानी दुनिया से अधिक धर्म की जरूरत है। डा.आंबेडकर ने यह बात 1950 में 'बुद्ध और उनके धर्म का भविष्यÓ नामक एक लेख में कही थी। वे कई बरस पहले से ही मन बना चुके थे कि वे उस धर्म में अपना प्राण नहीं त्यागेंगे जिस धर्म में उन्होंने अपनी पहली सांस ली है। 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया। आज उनके इस निर्णय को याद करने का दिन है. यह उनका कोई आवेगपूर्ण निर्णय नहीं था। बल्कि इसके लिए उन्होंने पर्याप्त तैयारी की थी। उन्होंने भारत की सभ्यतागत समीक्षा की. उसके सामाजिक-आर्थिक ढांचे की बनावट को विश्लेषित किया था और सबसे बढ़कर हिंदू धर्म को देखने का विवेक विकसित किया। जब अंग्रेजों से भारत की आजादी की लड़ाई लड़ी जा रही थी तो यह बात महसूस की गई थी कि भारत को अपनी अंदरूनी दुनिया में समतापूर्ण और न्यायपूर्ण होना है। अगर भारत एक आजाद मुल्क बनेगा तो उसे सबको समान रूप से समानता देनी होगी। केवल सामाजिक समानता और सदिच्छा से काम नहीं चलने वाला है। सबको इस देश के शासन में भागीदार बनाना होगा. डाक्टर आंबेडकर इस विचार के अगुवा थे। 1930 का दशक आते-आते भारत की आजादी की लड़ाई का सामाजिक आधार पर्याप्त विकसित हो चुका था। इसमें विभिन्न समूहों की आवाजें शामिल हो रही थीं। अब आजादी की लड़ाई केवल औपनिवेशिक सत्ता से लड़ाई मात्र तक सीमित न रहकर इतिहास में छूट गए लोगों के जीवन को इसमें समाहित करने की लड़ाई के रूप में तब्दील हो रही थी। जिनके हाथ में पुस्तकें और उन्हें सृजित करने की क्षमता थी। उन्होंने बहुत से समुदायों के जीवन को मुख्यधारा से स्थगित सा कर दिया था। शोषण के सांस्कृतिक, आर्थिक एवं राजनीतिक दासत्व के प्रकट-अप्रकट तन्तुओं को रेशा-रेशा अलग करके और इनसे मुक्ति पाने की कोशिशें शुरू हुईं। आंबेडकर आजादी की लड़ाई के राजनीतिक और ज्ञानमीमांसीय स्पेस में दलितों को ले आने में सफल हुए. उन्होंने कहा कि दलितों के साथ न्याय होना चाहिए। 1932 में पूना समझौते से पहले किए गए उनके प्रयासों को हम इस दिशा में देख-समझ सकते हैं। यद्यपि इस समय दलितों को पृथक निर्वाचक-मंडल नहीं मिल सका लेकिन अब उन्हें उपेक्षित नही किया जा सकता था. जब भारत आजाद हुआ तो देश का संविधान बना. सबको चुनाव लडऩे और अपने मनपसंद व्यक्ति को अपना नेता चुनने की आजादी मिली। आज दलित अपना नेता चुन रहे हैं, वे नेता के रूप में चुने जा रहे हैं. भारत के संविधान में आंबेडकर की इन अनवरत लड़ाइयों की खुशबू फैली है। उनके जीवन और आत्मा में प्रकाश शिक्षा ही ला सकती है. यही उन्हें उस दासता से मुक्त करेगी जिसे समाज, धर्म और दर्शन ने उनके नस-नस में आरोपित कर दिया है। इस दासता को दलितों को अपनी नियति मान लेने को कहा गया था। आंबेडकर इसे तोड़ देना चाहते थे। संजाल को तोड़कर एक ऐसे मुक्त मनुष्य की कल्पना कर रहे थे जो धार्मिक तो हो लेकिन गैर-बराबरी को जीवन मूल्य न माने. इसलिए जब अक्टूबर 1956 में उन्होंने हिंदू धर्म से अपना विलगाव किया तो उन्होंने स्वयं और अपने अनुयायियों को बाइस प्रतिज्ञाएं करवाईं।
               वक्ता रामकिशोर शुक्ला ने कहा कि आंबेडकर आधुनिकता, लोकतंत्र और न्याय की संतान थे. वे पेशे से वकील भी थे. मनुष्य की गरिमा को बराबरी दिए बिना वे आधुनिकता, लोकतंत्र और न्याय की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। उन्होंने भारतीय समाज में घर और बाहर-दोनों जगह स्त्रियों की बराबरी के लिए संघर्ष किए. जब वे जवाहरलाल नेहरू की सरकार में विधिमंत्री बने तो उन्होंने स्त्रियों को न केवल घरेलू दुनिया में बल्कि उन्हें आर्थिक और लैंगिक रूप से मजबूत बनाने के लिए हिंदू कोड बिल प्रस्तुत किया। यह बिल पास नहीं होने दिया गया. आंबेडकर ने इस्तीफा दे दिया। हमें इसे जानना चाहिए कि यह बिल क्यों पास नही होने दिया गया? यदि हम यह जान सकें तो अपने आपको न्याय की उस भावना के प्रति समर्पित कर पाएंगे जिसका सपना डाक्टर भीमराव आंबेडकर ने देखा था। गोष्ठी में सरस्वती मंदिर इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य रामसजीवन प्रजापति, प्रवक्ता भवनीशंकर, रामकिशोर शुक्ला, मानसिंह, हरिशरण चौरसिया, संतोष त्रिपाठी, प्रताप सिंह, राहुल झा, पवन सिंह, खिलावन सिंह, घूमन सिंह, पंचमलाल, अनिल कुमार, दीपिका तिवारी, हफीजन बानों, वैशाली, मानबेन्द्र, दिलीप दुवे, मनहोर आदि उपस्थित रहे तथा विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन संतोष त्रिपाठी ने किया।
रिपोर्ट अमित अग्रवाल